भिलाई/छत्तीसगढ़ के पूर्व राज्य मंत्री बदरुद्दीन कुरैशी ने, 10 मई 1857 भारतीय इतिहास का वह गौरवशाली दिन है जब देश के वीर सपूतों ने अंग्रेजी शासन के विरुद्ध प्रथम स्वतंत्रता संग्राम का बिगुल फूंका था । मेरठ से प्रारंभ हुआ यहां महान आंदोलन धीरे-धीरे पूरे देश में फैल गया और स्वतंत्रता की ज्योति प्रचलित हुई । इस संग्राम में मंगल पांडे, रानी लक्ष्मीबाई, तात्या टोपे, बेगम हजरत महल तथा अनेक वीर क्रांतिकारियों ने अपने प्राणों का बलिदान देकर मातृभूमि की रक्षा का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत किया। प्रथम स्वतंत्रता संग्राम ने भारतीयों में आजादी की चेतना और राष्ट्रीय एकता की भावनाओं को मजबूत किया। यद्यपि यह संघर्ष तत्काल सफल नहीं हो पाया, लेकिन इसी क्रांति ने आगे चलकर स्वतंत्रता आंदोलन की नींव रखी और देशवासियों में अंग्रेजी शासन के विरुद्ध संघर्ष का साहस जगाया । 1857 प्रथम स्वतंत्रता संग्राम संघर्ष दिवस के अवसर पर शहीद वीर सपूतों को विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं तथा उनके बलिदान, साहस और देशभक्ति को नमन करते हैं । उनका त्याग सदैव आने वाली पढ़ियों को राष्ट्रीय प्रेम और मातृभूमि की सेवा के लिए प्रेरित करता रहेगा।
