महासमुंद/छत्तीसगढ़ राज्य में, भू-राजस्व संहिता की धारा 73 के तहत वन ग्रामों को राजस्व ग्राम बनाने का प्रावधान है.
लोहारडीह पंचायत के आश्रित ग्राम उलट कोडार,पेंड्रा, बंजारी ,घोंगी बाहरा
, परसापानी, आमाझोला, राजस्व ग्राम घोषित करने का मांग ग्रामीणों शासन प्रशासन से किया,महासमुंद विधानसभा क्षेत्र ग्राम उलट कोडर मे अयोजित मड़ाई मेला कार्यक्रम में अशवंत तुषार साहू शामिल हुआ, मां शीतला समिति के तत्वाधान में भाजपा किसान नेता अशवंत तुषार साहू का फूल माला पहनकर भव्य स्वागत किया
उक्त बातें मड़ाई मेला कार्यक्रम में अशवंत तुषार साहू ने अपने उद्बोधन में कहा लोहारडीह पंचायत के संपूर्ण ग्राम को राजस्व ग्राम घोषित करने पर कानूनी पहचान, भूमि पर अधिकार और सभी विकास कार्यों का लाभ दिलाने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है, जिसके लिए वे लगातार सरकार से गुहार लगाते आ रहे है, “”इस मांग के मुख्य कारण और फायदे””:
भूमि अधिकारों की मान्यता: वन ग्रामों को राजस्व ग्राम बनाने से ‘वन अधिकार अधिनियम, 2006’ के तहत निवासियों को वन भूमि पर रहने और आजीविका के अधिकार (जैसे खेती) मिलते हैं। सरकारी योजनाओं का लाभ: राजस्व ग्राम बनने के बाद, इन बस्तियों को प्रधानमंत्री आवास योजना, पेयजल, बिजली, शिक्षा, स्वास्थ्य जैसी सभी सरकारी योजनाओं का लाभ मिलना शुरू हो जाता है। कानूनी पहचान: ‘भूलेख’ (Bhulekh) भूमि रिकॉर्ड प्रणाली में नया खाता, खसरा नंबर और नक्शा तैयार होता है, जिससे भूमि का स्वामित्व स्पष्ट होता है। प्रशासनिक सुविधा: यह राजस्व विभाग के लिए भी फायदेमंद है, क्योंकि इससे प्रशासनिक ढाँचा मजबूत होता है और गांवों का बेहतर प्रबंधन होता है।