भिलाई/छत्तीसगढ़ के पूर्व राज्य मंत्री बदरुद्दीन कुरैशी ने, भारत में लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण एवं पंचायती राज व्यवस्था के प्रमुख शिल्पकार बलवंत राय मेहता की पुण्यतिथि पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित। बलवंत राय मेहता का जीवन स्वतंत्रता संघर्ष, जनसेवा और ग्रामीण भारत के विकास के लिए समर्पण का प्रेरणादायी उदाहरण और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रमुख राजनेता थे और भारत में त्रि – स्तरीय पंचायती राज व्यवस्था की शिफारिश करने वाली समिति की अध्यक्षता करने के कारण उन्हें “पंचायती राज का जनक” या “शिल्पी” भी कहा जाता है। उनका जन्म 19 फरवरी 1900 को भावनगर में हुआ था। वे वर्ष 1920 में असहयोग आंदोलन से जुड़े तथा स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई। उन्होंने सविनय अवज्ञा आंदोलन और भारत छोड़ो आंदोलन में भी भाग लिया और ब्रिटिश शासन के दौरान कई वर्ष कारावास में रहे।
। वर्ष 1957 में बलवंत राय मेहता की अध्यक्षता वाली समिति ने लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण और ग्रामीण विकास के लिए महत्वपूर्ण सुझाव दिए, जिनसे आगे चलकर त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था—ग्राम, खंड/ब्लॉक और जिला स्तर— को मजबूत आधार मिला। भारत सरकार के अनुसार उनकी समिति की सिफारिशें पंचायती राज के विकास में ऐतिहासिक महत्व रखती हैं। युवा पीढ़ी विशेष रूप से ध्यान दे कि बलवंत राय मेहता से जुड़े तथ्य आज की प्रतियोगी परीक्षाओं में महत्वपूर्ण सामान्य ज्ञान का विषय हैं। इसलिए विद्यार्थी उनके जीवन, स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान, 1957 की बलवंत राय मेहता समिति तथा पंचायती राज व्यवस्था से संबंधित तथ्यों को अवश्य पढ़ें और याद रखें। उन्होंने कहा कि इतिहास केवल परीक्षा के लिए नहीं, बल्कि देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था और जनसेवा की भावना को समझने के लिए भी महत्वपूर्ण है।
